भारत में हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके परिवार ने मृत्यु के बाद 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ करने की परंपरा निभाई। लेकिन क्या है गरुड़ पुराण और क्यों इसे हिंदू धर्म में इतना महत्वपूर्ण माना जाता है?
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:
- गरुड़ पुराण क्या है और किसने लिखा
- मृत्यु के बाद आत्मा के बारे में हिंदू मान्यताएँ
- 13 दिनों का पाठ क्यों किया जाता है
- अलग-अलग धर्मों में मृत्यु और आत्मा के रहन-सहन की मान्यताएँ
- आधुनिक समय में गरुड़ पुराण का महत्व
गरुड़ पुराण: एक प्राचीन ग्रंथ
गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक है। यह मुख्यतः दो भागों में विभाजित है:
- पूर्व खंड (जीवन खंड):
- इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, यज्ञ, दान, तप और आयुर्वेद के बारे में बताया गया है।
- यह भाग जीवित लोगों को जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्यों और कर्मों के महत्व को समझाता है।
- उत्तर खंड (मृत्यु खंड):
- इसमें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, नरक, यमलोक, पिंडदान और मोक्ष के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई है।
- कुल मिलाकर इसमें लगभग 19,000 श्लोक हैं।
गरुड़ पुराण किसने लिखा और क्यों लिखा गया?
गरुड़ पुराण की उत्पत्ति के पीछे एक दिव्य कथा है:
- भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी ने मृत्यु और आत्मा की यात्रा से जुड़े सवाल भगवान विष्णु से पूछे।
- भगवान विष्णु ने उन्हें विस्तार से मृत्यु के बाद आत्मा की गति, यमलोक, नरक, पुनर्जन्म और मोक्ष के बारे में बताया।
- गरुड़ जी ने यह ज्ञान अपने पिता महर्षि कश्यप को सुनाया।
- बाद में महर्षि वेदव्यास ने इसे संकलित कर पुराण का रूप दिया। वेदव्यास ने अठारह महापुराणों को संकलित किया था और वेदों के ज्ञान को सामान्य लोगों के लिए समझने योग्य कथाओं में लिखा।

उद्देश्य:
- जीवित लोगों को कर्मों के महत्व और मोक्ष की प्रक्रिया सिखाना।
- मृत्यु और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को समझाना।
- परिवार और समाज में नैतिकता और धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति
हिंदू धर्म में कहा गया है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा अपने शरीर और मोह से मुक्त नहीं हो पाती।
- मृत्यु के समय आत्मा को अपने पुराने शरीर और प्रियजनों के प्रति मोह रहता है।
- दाह संस्कार के बाद भी आत्मा घर के आसपास मंडराती है, क्योंकि वह अपने पिछले जीवन से पूरी तरह अलग नहीं हो पाती।
- गरुड़ पुराण का पाठ इस मोह को कम करने, आत्मा को शांति देने और आगे की यात्रा के लिए मार्गदर्शन देने का माध्यम है।
क्या आत्मा मृत्यु के बाद घर में रहती है?
- मृत्यु के समय आत्मा तुरंत आगे नहीं बढ़ती।
- यदि परिवार रोता है या घर में भारी शोक है, तो आत्मा इसके प्रति संवेदनशील होती है।
- गरुड़ पुराण का पाठ उसे समझने और आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

13 दिनों की परंपरा का महत्व
हिंदू मान्यता में मृत्यु के बाद 13 दिन का समय आत्मा और परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है।
चरणवार प्रक्रिया:
- पहले 10 दिन:
- आत्मा का सूक्ष्म शरीर निर्माण होता है।
- पिंडदान के माध्यम से आत्मा के अंग और ऊर्जा तैयार होती है।
- 11वां और 12वां दिन:
- आत्मा घर से भोजन और ऊर्जा ग्रहण करती है।
- यह समय आत्मा के मोह और दुख को कम करने का होता है।
- 13वां दिन – ‘सपिंडीकरण’:
- मृतक का पिंड पितृलोक के पिंड के साथ मिला दिया जाता है।
- मोह का बंधन टूटता है।
- आत्मा अपनी नई यात्रा, यमलोक या पितृलोक की ओर अग्रसर होती है।
यह 13 दिन एक तरह से ‘बफर पीरियड’ हैं, जो आत्मा को धीरे-धीरे संसार से विमुख होने में मदद करते हैं।
गरुड़ पुराण का पाठ क्यों जरूरी माना जाता है
- आत्मा को शांति देने के लिए
- मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कठिन होती है।
- गरुड़ पुराण सुनकर आत्मा को मार्गदर्शन और शांति मिलती है।
- परिवार को मानसिक और आध्यात्मिक समर्थन देने के लिए
- 13 दिनों के पाठ से घर में धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- शोक और दुख धीरे-धीरे कम होता है।
- कर्म, पुण्य और पाप का ज्ञान देने के लिए
- मृतक और जीवित लोगों को सदाचार और पुण्य कर्म की याद दिलाता है।
- मोह और बंधनों से मुक्ति दिलाने के लिए
- मृत्यु के बाद आत्मा अपने मोह और लगाव से मुक्त नहीं होती।
- पाठ इसे धीरे-धीरे तोड़ता है।
अन्य धर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा
गरुड़ पुराण जैसी परंपरा केवल हिंदू धर्म में नहीं, बल्कि विश्व की कई संस्कृतियों में पाई जाती है:
धर्म / संस्कृति | मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति |
इस्लाम | दफन होने तक आत्मा घर के पास रहती है; 40 कदम दूर जाने पर फरिश्ते सवाल पूछते हैं। |
तिब्बती बौद्ध धर्म | ‘बारदो’ के अनुसार 49 दिनों तक आत्मा मध्यवर्ती स्थिति में रहती है; ‘बुक ऑफ द डेड’ का पाठ किया जाता है। |
ईसाई धर्म | आधिकारिक रूप से आत्मा तुरंत ईश्वर के पास जाती है, लेकिन कई संस्कृतियों में शांति पाने में समय लगता है। |
पारसी धर्म | तीन दिन तक आत्मा घर में रहती है; चौथे दिन आगे बढ़ती है। |
प्राचीन मिस्र | मृत शरीर के पास भोजन, नक्शे और गहने रखे जाते थे ताकि आत्मा को यात्रा में कोई कठिनाई न हो। |
सभी धर्म मानते हैं कि चेतना अचानक खत्म नहीं होती, और आत्मा को भौतिक जगत से पूरी तरह अलग होने में समय लगता है।
कौन-कौन से समुदाय इसे नहीं मानते
- आर्य समाज: पुराणों को प्रामाणिक नहीं मानते।
- शैव परंपरा: मृत्यु के बाद शिव वचन और महिमा पढ़ते हैं।
- केरल और अन्य जनजातीय समूह: गरुड़ पुराण का पाठ नहीं करते।
इससे पता चलता है कि प्रत्येक समुदाय की मृत्यु और आत्मा के प्रति अपनी परंपराएँ हैं।
आधुनिक समय में गरुड़ पुराण का महत्व
आज भी हिंदू परिवार इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं मानते। इसका महत्व आध्यात्मिक और मानसिक भी है:
- परिवार को धैर्य और सांत्वना मिलता है।
- मृतक के लिए शांति और मार्गदर्शन सुनिश्चित होता है।
- जीवन, मृत्यु, कर्म और मोक्ष के रहस्यों को समझने का एक सरल तरीका है।
गरुड़ पुराण केवल मृतक के लिए नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी शिक्षा और शांति का साधन है।
निष्कर्ष
- गरुड़ पुराण मृत्यु और आत्मा की यात्रा को समझने का प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
- 13 दिनों का पाठ आत्मा को शांति, मोह और दुख से मुक्ति और आगे की यात्रा के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- यह जीवन, मृत्यु और कर्म के महत्व को समझने का माध्यम भी है।
- भारत में यह प्रथा सदियों से चली आ रही है और आज भी लाखों परिवार इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाते हैं।









