क्या आप जानती हैं कि महिलाओं में माइग्रेन, पुरुषों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा होता है? शोध के अनुसार, लगभग 30% से 60% महिलाओं में माइग्रेन का सीधा संबंध उनके हार्मोनल बदलाव से होता है, खासकर पीरियड्स के आसपास।
कई महिलाओं के लिए यह सिर्फ एक सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो उनके काम, घर और निजी जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर देती है। मुंबई के प्रसिद्ध माइग्रेन विशेषज्ञ डॉ. के. रविशंकर (जसलोक और लीलावती अस्पताल) के अनुसार, "हार्मोनल बदलाव एक बड़ा कारण जरूर हैं, लेकिन अनियमित जीवनशैली और तनाव भी इसे गंभीर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।"
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि महिलाएं माइग्रेन को कैसे पहचानें और इसे नियंत्रित करने के लिए कौन से कदम उठाएं।
1. माइग्रेन और हार्मोन का गहरा रिश्ता
महिलाओं में माइग्रेन अक्सर एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है।
- पीरियड्स (Menstrual Migraine): मासिक धर्म शुरू होने से ठीक पहले जब एस्ट्रोजन का स्तर अचानक गिरता है, तो यह माइग्रेन को ट्रिगर करता है। इसे 'मेंस्ट्रुअल माइग्रेन' कहा जाता है।
- प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज: गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को माइग्रेन से राहत मिलती है, लेकिन मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के करीब आते ही हार्मोनल असंतुलन के कारण यह दर्द फिर से बढ़ सकता है।
- गर्भनिरोधक गोलियां: कुछ महिलाओं में बर्थ कंट्रोल पिल्स के सेवन से माइग्रेन की समस्या शुरू या तेज हो सकती है।
2. तनाव: एक मौन ट्रिगर
आज की महिलाएं घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी निभाती हैं। इस निरंतर भागदौड़ से शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो माइग्रेन के हमलों को और बढ़ा देते हैं।
- समाधान: रोजाना 15-20 मिनट योग, ध्यान (Meditation) या गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज करें।
- माइग्रेन डायरी: एक डायरी बनाएं जिसमें आप नोट करें कि दर्द कब शुरू हुआ, उस समय आपने क्या खाया था और तनाव का स्तर क्या था। इससे आपको अपने व्यक्तिगत 'ट्रिगर्स' पहचानने में मदद मिलेगी।

3. खान-पान और कैफीन का प्रबंधन
जो आप खाती हैं, उसका सीधा असर आपके दिमाग की नसों पर पड़ता है।
क्या करें | क्या न करें |
हर 3-4 घंटे में छोटा और पौष्टिक भोजन लें। | लंबे समय तक भूखे न रहें या व्रत-उपवास न करें। |
दिनभर में 2-3 लीटर पानी पिएं (हाइड्रेटेड रहें)। | प्रोसेस्ड फूड, पुराना पनीर (Aged Cheese) और आर्टिफिशियल मिठास से बचें। |
मैग्नीशियम युक्त आहार जैसे बादाम और हरी सब्जियां लें। | बहुत ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन न करें (Limit Caffeine)। |
4. जीवनशैली में जरूरी बदलाव
डॉ. रविशंकर के अनुसार, माइग्रेन के मरीजों के लिए 'नियमितता' (Consistency) सबसे बड़ा इलाज है।
- नींद का पक्का समय: रोज एक ही समय पर सोएं और जागें। नींद की कमी या जरूरत से ज्यादा नींद, दोनों ही माइग्रेन बढ़ा सकते हैं।
- स्क्रीन टाइम कम करें: फोन और लैपटॉप की नीली रोशनी आंखों पर दबाव डालती है। काम के बीच में ब्रेक लें।
- हल्का व्यायाम: नियमित पैदल चलना (Brish Walking) शरीर में एंडोर्फिन बढ़ाता है, जो प्राकृतिक दर्द निवारक का काम करता है।
5. डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो विशेषज्ञ (Neurologist) से संपर्क करने में देरी न करें:
- अगर महीने में 3-4 बार से ज्यादा तेज सिरदर्द हो।
- दर्द के साथ उल्टी, रोशनी या शोर से बहुत ज्यादा तकलीफ हो।
- पेनकिलर लेने के बावजूद आराम न मिले।
- दृष्टि में धुंधलापन या हाथ-पैरों में झुनझुनी महसूस हो।
डॉक्टर की सलाह: आजकल माइग्रेन के लिए Triptans और Prophylactic जैसी नई दवाएं उपलब्ध हैं, जो न केवल दर्द को रोकती हैं बल्कि इसके बार-बार होने की आवृत्ति को भी कम कर देती हैं।








