रांची (झारखंड) — रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) की सरकारी जमीन पर लंबे समय से हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले की पूरी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से कराने का आदेश दिया है और दोषी अधिकारियों, संस्थाओं और बिल्डरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जालसाजी का शिकार हुए आम नागरिकों को उचित मुआवजा दिलाया जाए। इस मामले को भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है।
⚖️ हाईकोर्ट के निर्देश
- RIMS की सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण की व्यापक जांच ACB द्वारा कराई जाए।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, बिल्डरों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जमीन पर बने अवैध मकानों और संरचनाओं के मालिकों और आम लोगों को मुआवजा दिया जाए।
- जांच में भूमि रजिस्ट्री, नक्शा, म्यूटेशन और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी ध्यान दिया जाए।
🏗️ भूमि पर क्या हुआ?
- रिपोर्टों के अनुसार, RIMS की जमीन लगभग 7 एकड़ में फैलती है।
- इस भूमि पर अवैध रूप से 50 से अधिक मकान, दुकानें, धार्मिक स्थल और मल्टी‑स्टोरी बिल्डिंगें बन चुकी हैं।
- कई अपार्टमेंट और दुकानों की बिक्री भी हो चुकी थी, जबकि यह सरकारी जमीन थी।
कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके पास किराया या बिक्री के दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन कोर्ट ने भूमि के आधिकारिक अभिलेखों को वैध माना।
जांच का दायरा
हाईकोर्ट ने ACB को निर्देश दिया है कि जांच में शामिल हों:
- भूमि नामांकन, म्यूटेशन और नक्शा पास करवाने में शामिल अधिकारी।
- नगर निगम, RERA या बैंक द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र या मंजूरी।
- RIMS प्रशासन और जिला प्रशासन की किसी भी लापरवाही या मिलीभगत का पता।
- जिन लोगों के घर हटाए जा रहे हैं, उनके लिए मुआवजे का निर्धारण।
मुआवजा और प्रभावित लोग
- अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के घर हटाए जा रहे हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
- यह मुआवजा सरकारी कोष से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूला जाएगा।
- अदालत ने प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
- जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुछ अवैध निर्माणों को तोड़ना शुरू कर दिया है।
- यह अभियान विवादों और स्थानीय विरोध के बीच जारी है, क्योंकि कई परिवारों को अपने निवास खोने का डर है।
मामले का महत्व
यह मामला केवल जमीन के अतिक्रमण तक सीमित नहीं है। यह सरकारी जमीन पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और मिलीभगत को उजागर करता है। अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है और प्रभावित लोगों को न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को तय की है, जिसमें जांच की प्रगति और आगे की कार्रवाई पर विस्तृत फैसला हो सकता है।









