रिपोर्ट - मो० काजीरूल शेख
पाकुड़, झारखंड: पाकुड़ जिले के अमरापाड़ा स्थित पचवाड़ा सेंट्रल कोल माइंस ग्रामीणों की विभिन्न मांगों के चलते लगातार पांचवें दिन भी बंद पड़ी हुई है। खदान में न तो कोयले का उत्खनन हो रहा है और न ही परिवहन कार्य, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियां लगभग ठहर गई हैं।
खदान के बंद रहने से सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, ट्रांसपोर्टरों, डंपर मालिकों, चालकों और उपचालकों सहित हजारों लोगों के लिए गंभीर रोजगार संकट खड़ा हो गया है। पहले से ही ईएमआई, टैक्स और बीमा जैसी आर्थिक जिम्मेदारियों से जूझ रहे ट्रांसपोर्टरों के लिए यह बंदी कमर तोड़ने वाली साबित हो रही है।
खदान क्षेत्र में सैकड़ों डंपर खड़े हैं, जिससे जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर छोटे दुकानदार, होटल व्यवसायी और अन्य सहायक व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों की मांगों को लेकर सहमति-असहमति के पहलू अलग हो सकते हैं, लेकिन अब तक समाधान की दिशा में ठोस पहल न होना चिंता का विषय बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक मौजूदगी में संवाद और वार्ता की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखते हुए, उद्योग को पूरी तरह बंद किए बिना भी समाधान निकाला जा सकता था।
कोल परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होने वाले पक्ष स्पष्ट हैं, इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि कब वे सक्रिय होकर ग्रामीणों की मांगों का समाधान निकालते हैं और ठप पड़ी माइंस को पुनः चालू कराते हैं, जिससे हजारों लोगों को राहत मिल सके।









