पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिजाब (नकाब) हटाए जाने के बाद चर्चा में आईं आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन की सरकारी नौकरी को लेकर सस्पेंस अब लगभग खत्म होता दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जॉइनिंग की अंतिम समयसीमा यानी 31 दिसंबर 2025 समाप्त हो चुकी है, लेकिन नुसरत ने अब तक अपनी पोस्टिंग पर योगदान (Join) नहीं किया है।
अंतिम तारीख खत्म, अब क्या होगा?
राज्य स्वास्थ्य समिति ने आयुष चिकित्सकों की जॉइनिंग के लिए पहले ही तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी थी। विभाग की मंशा थी कि कोई भी योग्य उम्मीदवार तकनीकी या व्यक्तिगत कारणों से इस अवसर से वंचित न रहे। हालांकि, इस राहत के बावजूद नुसरत परवीन की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला।
पटना के सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने स्पष्ट किया है कि:
- नुसरत परवीन ने निर्धारित समय के भीतर ड्यूटी जॉइन नहीं की है।
- विभाग की ओर से अब दोबारा तिथि बढ़ाने का कोई फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
- नियमों के अनुसार, बिना किसी वैध लिखित सूचना के समयसीमा बीतने पर अभ्यर्थिता रद्द की जा सकती है।
63 डॉक्टरों ने किया योगदान, नुसरत क्यों रहीं दूर?
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चयनित सूची में शामिल 63 आयुष चिकित्सकों ने अपनी-अपनी पोस्टिंग वाली जगहों पर कार्यभार संभाल लिया है। पूरे मामले में डॉ. नुसरत की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने न तो कोई छुट्टी का आवेदन दिया है और न ही जॉइनिंग में हो रही देरी का कोई औपचारिक कारण बताया है।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला दिसंबर के मध्य में शुरू हुआ था, जब पटना में नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे थे।
- वीडियो वायरल: कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नुसरत परवीन के चेहरे से नकाब हटाया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
- राजनीतिक तूल: इस घटना पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे पिता-पुत्री जैसा सहज व्यवहार बताया।
- पारिवारिक स्थिति: ख़बरों के मुताबिक, इस घटना के बाद नुसरत और उनका परिवार मानसिक रूप से आहत महसूस कर रहा था और वे कुछ समय के लिए पटना छोड़कर कोलकाता चले गए थे।
विभाग का कड़ा रुख: क्या रद्द होगी नियुक्ति?
सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार ठोस कारण के साथ विभाग को लिखित आवेदन देता है, तभी ऊपरी स्तर पर कोई विचार किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए नुसरत परवीन की नियुक्ति अब खतरे में दिख रही है। विभाग इसे "अंतिम अवसर" मानकर चल रहा था, जो अब समाप्त हो चुका है।









