रांची: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने हाल ही में नुसरत परवीन को 3 लाख रुपये की नौकरी, मनचाही पोस्टिंग, गाड़ी-बंगला समेत हर सुविधा देने का ऐलान कर धमाका कर दिया। उन्होंने कहा कि नुसरत चाहें तो राज्य में कहीं भी ज्वाइन कर सकती हैं। लेकिन इस ऐलान के बाद की हकीकत बिल्कुल उल्टी है।
इरफान अंसारी के बड़े-बड़े बयान और ऐलान जनता के सामने “हवा में उड़ते बुलबुले” साबित हुए हैं। उनके दावे कि झारखंड में स्वास्थ्य तंत्र दुरुस्त है, तीन हालिया घटनाओं ने पूरी तरह खोखला कर दिया।
मंत्री के दावों पर तीन शर्मनाक मामले
1️⃣ चाईबासा में झोले में शव ले जाना पड़ा
एक छोटे बच्चे की मौत के बाद परिजन शव वाहन न मिलने के कारण अपने बच्चे का शव झोले में घर ले गए। मंत्री ने बार-बार दावे किए कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है, लेकिन जमीन पर यह क्या हकीकत दिखाती है?
2️⃣ रांची के कांके CHC में डॉक्टरों का गानों पर डांस
जहां मंत्री दावा करते हैं कि अस्पताल अनुशासन का पैमाना हैं, वहीं डॉक्टर भोजपुरी गानों पर डांस कर रहे थे। नो साइलेंस जोन का उल्लंघन और अस्पताल में मनोरंजन, मंत्री के दावों की सच्चाई को सीधे चुनौती देता है।
3️⃣ हजारीबाग में ऑपरेशन टॉर्च की रोशनी में
एक महिला का पारिवारिक योजना ऑपरेशन बिजली गुल होने के कारण मोबाइल टॉर्च की रोशनी में किया गया। जनरेटर या बैकअप न होने के बावजूद मंत्री बड़े-बड़े दावे कर रहे थे कि स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त है।
केवल सुर्खियों के लिए मरीजों की सुरक्षा खतरे में
इरफान अंसारी के ऐलान सिर्फ सामाजिक और राजनीतिक सुर्खियों के लिए हैं। उनके दावे और घोषणाएं जनता के लिए खाली बयान साबित हो रही हैं, जबकि अस्पतालों में:
- शव वाहन नहीं
- ऑपरेशन थिएटर में बिजली नहीं
- अनुशासनहीन माहौल
…यह सब रोजमर्रा की हकीकत है।
सवाल सीधे जनता से: अगर मंत्री का काम स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारना है, तो क्या सुर्खियां और ऐलान मरीजों की सुरक्षा और सुविधा से ज्यादा जरूरी हैं?
निष्कर्ष:
इरफान अंसारी के चमक-दमक वाले बयान अब जनता के गले नहीं उतर रहे। स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीन पर उनकी नीति शून्य साबित हो चुकी है। अब जनता मांग रही है कि मंत्री सुर्खियों के लिए नहीं, काम के लिए आगे आएं।









