रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य की पहली 'झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज' (Jharkhand University of Health Sciences) की स्थापना को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय के संचालन के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 'मील का पत्थर' साबित होगी यूनिवर्सिटी
झारखंड मंत्रालय में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रांची के बॉम्बे (नामकुम क्षेत्र) में स्थापित होने वाली यह यूनिवर्सिटी झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे में एक 'माइलस्टोन' साबित होगी।
बैठक के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- पहला मेडिकल विश्वविद्यालय: यह झारखंड का पहला समर्पित स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय होगा।
- नियुक्ति प्रक्रिया: मुख्यमंत्री ने फैकल्टी मेंबर्स की नियुक्ति और नियमावली (Rules) गठन की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का निर्देश दिया है।
- NMC गाइडलाइंस: सभी प्रक्रियाएं नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानकों के अनुरूप पूरी की जाएंगी।
- आधुनिक शोध: यूनिवर्सिटी का उद्देश्य केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि मेडिकल रिसर्च और मानव संसाधन को आधुनिक बनाना भी है।
शोध और उन्नत सेवाओं पर जोर
मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने विजन साझा करते हुए कहा कि इस यूनिवर्सिटी को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि यह मेडिकल शोध (Medical Research) के केंद्र के रूप में उभरे। इससे न केवल छात्रों को उच्च स्तरीय शिक्षा मिलेगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी उन्नत और आधुनिक बनाया जा सकेगा।
"हमारी सरकार राज्य की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर तथा मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" — हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री
भविष्य की योजना
झारखंड स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 के तहत इस संस्थान की नींव रखी गई है। अब सरकार का ध्यान इसके इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक सत्र को जल्द से जल्द शुरू करने पर है। इससे राज्य के मेडिकल छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।









