चतरा की सोंधी खुशबू: मकर संक्रांति के त्योहार की रौनक
झारखंड के चतरा जिले के बाजारों में इन दिनों एक अलग ही फिजा है। यह फिजा है—सोंधेपन की, परंपरा की और उस मिठास की जो सीधे आपके दिल तक पहुँचती है। मकर संक्रांति का पावन त्योहार नजदीक है, और चतरा की सड़कों पर कदम रखते ही तिल और गुड़ के मिलन की खुशबू आपका स्वागत करती है।
पहले चतरा तिलकुट के लिए बाहर के शहरों पर निर्भर था, लेकिन अब यही तिलकुट उड़ीसा, राउरकेला और हजारीबाग तक पहुँच रहा है। चंद्रकांत कुमार जैसे स्थानीय व्यवसायी बताते हैं कि उनके तिलकुट की भारी मांग पूरे राज्य और उससे बाहर भी है।
"पहले हम लोग बाहर से तिलकुट मंगाकर बेचते थे, अब स्थिति उलटी है। चतरा का तिलकुट सरहदों के पार भी पसंद किया जा रहा है।" – चंद्रकांत कुमार, तिलकुट व्यवसायी
मकर संक्रांति से पहले बाजारों में तिलकुट के पहाड़, गुड़-तिलवा और सोंधी रेवड़ी की महक हर किसी का मन मोह रही है। यह न केवल त्योहार की रौनक बढ़ा रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर भी लेकर आई है।

चतरा के तिलकुट की प्रमुख किस्में हैं:
- गुड़ तिलकुट – स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में खास लोकप्रिय
- चीनी तिलकुट – मीठे स्वाद के लिए सबसे पसंदीदा
- खोया तिलकुट – विशेष अवसरों के लिए उपयुक्त
कीमत: ₹200 – ₹400 प्रति किलो
इस मिठास की वजह से चतरा के कई युवाओं को अब अपने शहर में ही सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है। यह 'रिवर्स माइग्रेशन' चतरा के लिए गौरव की बात है और स्थानीय उद्योग की मजबूती को दर्शाता है।
मकर संक्रांति पर तिलकुट, लड्डू, गजक और तिलवा का प्रसाद ग्रहण करना सनातन धर्म में सदियों पुरानी परंपरा है। इस साल भी चतरा के बाजारों में यह परंपरा जीवंत नजर आ रही है।








