पटना: बिहार सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों की एक बड़ी समस्या का समाधान कर दिया है। अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक अपनी वंशावली (Genealogy Certificate) आसानी से बनवा सकेंगे। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में सरकार ने यह जिम्मेदारी अब अंचलाधिकारी (CO) को सौंप दी है।
सरकार का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्पष्टता लाता है, बल्कि सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
राज्य में वर्तमान में विशेष भूमि सर्वे का काम चल रहा है। इस सर्वे के लिए वंशावली सबसे अनिवार्य दस्तावेजों में से एक है। अब तक शहरी क्षेत्रों में यह स्पष्ट नहीं था कि वंशावली कौन जारी करेगा, जिसके कारण हजारों परिवार जमीन के बंटवारे और दाखिल-खारिज (Mutation) जैसे कामों के लिए भटक रहे थे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा की इस दूरदर्शी सोच ने अब शहरी जनता की इस उलझन को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
नए नियम की मुख्य बातें:
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- शहरी क्षेत्र: नगर निकाय क्षेत्रों (निगम, परिषद, पंचायत) के लोग अब सीधे अपने अंचल कार्यालय (Block Office) में आवेदन कर CO से वंशावली प्राप्त कर सकेंगे।
- ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों में पहले की तरह सरपंच को ही वंशावली बनाने का अधिकार बना रहेगा।
- तत्काल प्रभाव: महाधिवक्ता (Advocate General) से कानूनी सलाह लेने के बाद इस नियम को पूरे राज्य में तुरंत लागू कर दिया गया है।
सरकार के इस कदम के फायदे
बिहार सरकार का यह फैसला "जनता के द्वार पर शासन" की अवधारणा को सच करता है:
- जमीन सर्वे में तेजी: अब शहरी क्षेत्रों में जमीन सर्वे का काम बिना किसी रुकावट के तेजी से पूरा हो सकेगा।
- विवादों में कमी: स्पष्ट वंशावली होने से पारिवारिक संपत्ति के विवादों और कानूनी मुकदमों में भारी गिरावट आएगी।
- पारदर्शिता और सुविधा: उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें समयबद्ध तरीके से पारदर्शी सेवा मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का कथन: > "हमारी सरकार का लक्ष्य आम जनता की परेशानियों को कम करना है। शहरी क्षेत्रों में वंशावली को लेकर जो संशय था, उसे खत्म कर दिया गया है। अब नागरिक अपने अंचल कार्यालय से आसानी से यह प्रमाण पत्र बनवा सकेंगे, जिससे भूमि सुधार कार्यों में गति आएगी।"
निष्कर्ष
बिहार सरकार ने एक बार फिर साबित किया है कि वह आम जनता की छोटी से छोटी समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। वंशावली बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाकर सरकार ने न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, बल्कि डिजिटल और आधुनिक बिहार की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है।









