बांग्लादेश में बीते कई दिनों से जारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। सरकार विरोधी आंदोलनों, सड़कों पर उतरती भीड़ और लगातार बढ़ती राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच देश के प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने पूरे देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
दरअसल, मोहम्मद यूनुस हाल ही में सरकार विरोधी आंदोलन से जुड़े रहे उस्मान हादी के जनाज़े में शामिल हुए। इस दौरान हालात ऐसे थे कि जनाज़ा एक तरह से विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा और चारों तरफ सरकार विरोधी नारे गूंजने लगे।
जनाज़े में बदला माहौल, सड़क पर उतरा जनसैलाब
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस्मान हादी के जनाज़े में हजारों नहीं बल्कि लाखों की संख्या में लोग शामिल हुए। राजधानी समेत आसपास के इलाकों से लोग पैदल, मोटरसाइकिल और वाहनों से जनाज़े में पहुंचे। सड़कें पूरी तरह भर गईं, यातायात ठप हो गया और हालात को संभालने के लिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी।
इस दौरान माहौल बेहद भावुक और आक्रोश से भरा हुआ था। लोगों की आंखों में आंसू थे, लेकिन सरकार के खिलाफ गुस्सा भी साफ नजर आ रहा था।
मोहम्मद यूनुस का बड़ा बयान: “उस्मान हादी की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी”
जनाज़े के दौरान जब मोहम्मद यूनुस ने भीड़ को संबोधित किया, तो पूरा इलाका तालियों और नारों से गूंज उठा। यूनुस ने कहा—
“उस्मान हादी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, वह एक विचार थे। हम उनकी मौत को जाया नहीं जाने देंगे। उन्होंने जिस बदलाव का सपना देखा था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।”
यूनुस ने आगे कहा कि बांग्लादेश को डर और दमन की राजनीति से बाहर निकालने की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में संकेत दिया कि देश में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी और न्याय के लिए संघर्ष अब और तेज होगा।
शेख हसीना सरकार के मुखर आलोचक थे उस्मान हादी
गौरतलब है कि उस्मान हादी बीते लंबे समय से प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे थे। वे कई आंदोलनों के प्रमुख चेहरों में से एक थे और लगातार सरकार पर—
- विपक्ष की आवाज दबाने
- प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने
जैसे गंभीर आरोप लगाते रहे थे।
उस्मान हादी युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय थे और उन्हें सरकार विरोधी आंदोलन की एक मजबूत आवाज माना जाता था।
मौत को लेकर उठ रहे सवाल, विपक्ष का सरकार पर आरोप
उस्मान हादी की मौत के बाद से ही कई सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि उनकी मौत सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि सरकार की दमनकारी नीतियों का नतीजा है।
हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है, लेकिन जनता के बीच अविश्वास का माहौल बना हुआ है। इसी कारण जनाज़े के दौरान भारी भीड़ और आक्रोश देखने को मिला।
यूनुस की मौजूदगी से बदले सियासी समीकरण
मोहम्मद यूनुस की जनाज़े में मौजूदगी को केवल एक मानवीय कदम नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस का यह कदम सरकार विरोधी ताकतों को एकजुट कर सकता है।
यूनुस पहले भी बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर मुखर रहे हैं। ऐसे में उनका यह बयान आने वाले समय में सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है आंदोलन
विशेषज्ञों का कहना है कि उस्मान हादी की मौत और मोहम्मद यूनुस के बयान के बाद बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन और तेज हो सकता है। विपक्षी दलों को एक भावनात्मक मुद्दा मिल गया है, वहीं जनता का गुस्सा भी सड़कों पर साफ नजर आ रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शेख हसीना सरकार इस बढ़ते असंतोष से कैसे निपटती है और क्या देश में हालात काबू में आ पाते हैं या नहीं।









