रांची: झारखंड सरकार द्वारा बिहार की डॉक्टर नुसरत प्रवीण को राज्य में नौकरी देने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भानु प्रताप शाही ने कहा कि बिहार जैसे दूसरे राज्य से किसी व्यक्ति को बुलाकर झारखंड में नौकरी देने की घोषणा करना न केवल समझ से परे है, बल्कि यह राज्य के युवाओं के हितों के खिलाफ भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह नियुक्ति किस नियम, प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधान के तहत की जा रही है।
नियम और प्रक्रिया पर सवाल
भाजपा नेता ने कहा कि सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए निर्धारित नियम, विज्ञापन, चयन प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षा जैसी व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे में बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के किसी बाहरी व्यक्ति को नौकरी देने की घोषणा करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस नियुक्ति के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) या स्वास्थ्य विभाग की निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं।
झारखंड के युवाओं के साथ अन्याय का आरोप
भानु प्रताप शाही ने आरोप लगाया कि झारखंड में पहले से ही हजारों योग्य, प्रशिक्षित और बेरोजगार डॉक्टर एवं युवा मौजूद हैं, जो वर्षों से सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में बाहरी राज्य से लोगों को प्राथमिकता देना राज्य के युवाओं के साथ सीधा अन्याय है।
उन्होंने कहा,
“झारखंड के युवाओं को दरकिनार कर बाहर के लोगों को नौकरी देना राज्य की जनता की भावनाओं के खिलाफ है। सरकार को पहले अपने राज्य के बेरोजगारों के बारे में सोचना चाहिए।”
सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
भाजपा नेता ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास इस नियुक्ति को लेकर कोई वैध नियम या प्रक्रिया है, तो उसे सामने लाया जाना चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार
इस मुद्दे को लेकर झारखंड की राजनीति और गरमाने के आसार हैं। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया या स्पष्ट जवाब नहीं दिया, तो इसे विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।
फिलहाल, इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









